झल्लार में राम कथा का द्वितीय दिवस: निर्मल मन से प्रभु भक्ति का संदेश, संतों का आशीर्वाद जीवन को धन्य बनाता है
रिपोर्ट श्याम आर्य
झल्लार, श्री राम कथा के द्वितीय दिवस भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथावाचक पंडित प्रमोद शुक्ला जी ने निर्मल मन से प्रभु भक्ति का गहन संदेश देते हुए जय-विजय के श्राप वृतांत से कथा का सूत्रपात किया। उन्होंने बताया कि वैकुंठ के द्वारपाल जय-विजय का सनकादिक चार संतों से अपमान होने पर संतों ने उन्हें श्राप दिया। चूंकि वे महालक्ष्मी के गार्ड थे, इसलिए भगवान विष्णु से प्राप्त श्राप पर महालक्ष्मी ने प्रार्थना की। परिणामस्वरूप भगवान ने संकल्प लिया कि वे तीन जन्मों तक पृथ्वी लोक पर अवतरित होकर उनका उद्धार करेंगे।कथा के दौरान कथावाचक ने सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर भक्ति का स्वरूप विस्तार से समझाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भक्ति का आधार निर्मल मन है, जिसमें लगन और समर्पण अनिवार्य है। प्रभु प्राप्ति के लिए कर्म प्रधान हैं—जैसे कर्म, वैसा फल। “अपने जीवन में उतने ही अच्छे कर्म करें जितने संभव हों,” उन्होंने उपदेश दिया। अच्छे कर्मों में दूसरों को कष्ट न देना, बुजुर्गों की सेवा-अनादर-सम्मान, तथा संत महिमा का चिंतन प्रमुख हैं। झल्लार स्थित श्री श्री 1008 श्री धूनी वाले दादाजी के दरबार की महिमा का विशेष बखान करते हुए कहा गया कि संतों का आशीर्वाद जीवन को धन्य बनाता है।कथा में जय-विजय के तीन जन्मों का रोचक वृतांत सुनाया गया। प्रथम जन्म में वे हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष, द्वितीय में रावण-कुंभकर्ण, तथा तृतीय में शिशुपाल-कंस के रूप में प्रकट हुए। प्रत्येक जन्म में भगवान परब्रह्म ने उनके हाथों उद्धार किया। पूरा वृत्तांत आगामी कथा दिवसों में विस्तार से सुनाया जाएगा। कथावाचक ने भावुक स्वर में कहा, “कथा सुनाने वाला महान होता है, सुनने वाला भी महान, किंतु जो सुनकर जीवन में उतार ले, वही सर्वश्रेष्ठ है। समय रहते भक्ति की नैया में बैठकर प्रभु चरणों पर लग जाओ।”राम कथा का आयोजन देर रात्रि 9:00 बजे से प्रारंभ होकर सत्संग-प्रवचन के रूप में दो दिवसों से निरंतर चल रहा है। ग्रामवासी बड़ी संख्या में पहुंचकर आनंद ले रहे हैं। द्वितीय दिवस की कथा संत महिमा और कर्मों पर विशेष जोर देकर संपन्न हुई। भक्तों ने कथा के समापन पर भगवान राम की जयकारे लगाए। आगामी दिवसों में कथा और गहन होने की अपेक्षा है।







