भीमपुर विकासखंड के रंभा गांव में गैस सिलेंडर से लगी भयंकर आग: घर मिनटों में राख, छोटे बच्चों की जान पर बनी
ग्रामीणों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
भीमपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत रंभा में रविवार शाम एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। 32 वर्षीय मजदूर पतिराम पिता सुखलाल के कच्चे-पक्के घर में गैस सिलेंडर से अचानक भड़की आग ने मात्र कुछ ही पलों में पूरा घर राख में बदल दिया। घर में अकेले मौजूद छोटे बच्चों की जान पर बन आई, लेकिन पड़ोसियों और ग्रामीणों की फुर्ती भरी कार्रवाई से कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। यह हादसा गैस सिलेंडर के असुरक्षित उपयोग के खतरों को फिर एक बार उजागर करता है।
घटना का पूरा विवरण
ग्रामीणों के अनुसार, पतिराम का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। घर में कोई बुजुर्ग सदस्य नहीं है और पतिराम अपनी दैनिक मजदूरी के लिए बाहर गया है। शनिवार पतिराम पुत्र निलेश (उम्र लगभग 12 वर्ष) को खाना बनाने समय निलेश ने गैस सिलेंडर जलाई और बर्तन में भोजन रखकर किसी अन्य काम में व्यस्त हो गया। ध्यान न देने के कारण भोजन जलकर राख हो गया, जिससे गैस पर भयंकर आग भड़क उठी।आग की लपटें इतनी तेज रफ्तार से फैलीं कि देखते ही देखते पूरा घर धधक उठा। घर में रखे अनाज के ढेर, कपड़े, बिस्तर, और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज सहित सारा सामान जलकर खाक हो गया। अफरा-तफरी मच गई। छोटे बच्चे डर के मारे चीखने लगे और इधर-उधर भागने की कोशिश करने लगे। आग की चपेट इतनी विकराल थी कि आसपास के घरों तक खतरा मंडराने लगा।
ग्रामीणों की एकजुटता ने बचाई जानें
ग्रामीणों ने धुआं और चीखें सुनते ही दौड़ लगाई। उन्होंने बाल्टियों, मटकों और हैंडपंप से पानी भरकर आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी। ग्रामीण ने बताया, “हमने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी, लेकिन वे पहुंचने से पहले ही हमारी सामूहिक कोशिश से आग 70 प्रतिशत तक काबू में आ गई। वह तो शुक्र है कि गैस सिलेंडर नहीं फटा नहीं तो घटना बहुत विकराल रूप ले सकती थी सौभाग्य से बच्चे सुरक्षित है देर समय बाद फायर ब्रिगेड की टीम भैंसदेही से पहुंची और शेष आग को पूरी तरह बुझा दिया।इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन पतिराम का पूरा परिवार बेघर हो गया। अब वे पड़ोसियों के सहारे गुजारा कर रहे हैं। ग्रामीणों ने दर्द भरे लहजे में कहा, “पतिराम मजदूरी करता है, परिवार की सारी जिम्मेदारी उसी पर। आग इतनी तेज थी कि कुछ बचाने का मौका ही नहीं मिला।
*प्रशासन से तत्काल सहायता की गुहार है*
प्रशासनिक कार्रवाई और जागरूकता की मांग जिला प्रशासन को घटना की सूचना कल दी जाएगी। ग्रामीणों ने कहा ने राहत सामग्री जैसे तंबू, अनाज, कपड़े और अस्थायी आवास की व्यवस्था की जाए प्रभावित परिवार का मुआयना रात तक नहीं हो सका, लेकिन सोमवार सुबह अधिकारी घटनास्थल पहुंचें सकते है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गैस सिलेंडर के सुरक्षित उपयोग पर गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाए। गैस वितरक कंपनियों को निर्देश देकर नियमित जांच और प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की जरूरत बताई जा रही है।यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में गैस रसोई के बढ़ते उपयोग के साथ जुड़े जोखिमों की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिलेंडर लीकेज, रेगुलेटर की खराबी या लापरवाही से ऐसी दुर्घटनाएं आम हो रही हैं। ग्रामीणों ने अपील की है कि सभी परिवार गैस चूल्हा जलाते समय सतर्क रहें और बच्चों को अकेले न छोड़ें।







