पश्चिम वन मंडल के खामापुर सर्किल में जाफरी बीट: वन माफियाओं का सागौन की अवैध कटाई पर हमला, वन विभाग में हड़कंप
भीमपुर रिपोर्ट श्याम आर्य
पश्चिम वन मंडल के चिचोली रेंज अंतर्गत खामापुर सर्किल के जाफरी बीट के घने जंगलों में वन माफियाओं ने बैशकीमती सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई कर दी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, करीब 10 से 15 सागौन के पेड़ काटे गए, इस घटना ने वन विभाग में खलबली मचा दी है, और वन विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं।घटना एक दिन पहले रात की बताई जा रही है। जाफरी बीट के जंगलों में वन माफियाओं ने सेंधमारी और मूल्यवान सागौन के पेड़ों को काट दिया गया सुबह गश्ती दल को कटे हुए पेड़ देखे तो जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया। जानकारों का कहना है कि कटाई के बाद वन विभाग सागौन को रफा-दफा करने की कोशिश में लगे थे,क्या खैर ये जांच का विषय है लेकिन मामला सोशल मीडिया तक पहुंच ही गया वन विभाग के कुछ जानकारों ने बताया कि वन विभाग की गश्ती टीम की सक्रियता से वे तस्कर सफल नहीं हो सके।
वन विभाग की लापरवाही पर सवाल
स्थानीय निवासियों ने वन विभाग के बीट गार्ड पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बीट गार्ड की निगरानी में चूक के कारण यह घटना इतनी देर से पकड़ में आई। वन क्षेत्र के जानकारों ने बताया कि जाफरी बीट में नियमित गश्त की कमी से वन संपदा को नुकसान हो रहा है। विभाग के जिम्मेदार अफसर’ क्या कुंभकर्णीय नींद’ में सोए हुए हैं जिधर देखो उधर वन विभाग के अवैध कटाई के मामले लगातार सामने आ रहे हैं
पश्चिमी वन मंडल के खामांपुर के जाफरी बीट की अवैध सागौन कटाई मामले में वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है,
रेंजर का बयान: चार पेड़ कटे, दो संदिग्धों का नंबर ट्रेस
इस संबंध में पश्चिम वन मंडल के रेंजर शैलेंद्र चौरसिया ने बताया, “यह खामापुर बीट की नहीं, बल्कि जाफरी बीट की घटना है। परसों रात को जप्ती दल गश्त पर था। उसी दिन एक संदिग्ध अल्टो गाड़ी घूम रही थी, जिससे पूछताछ की गई। रात में पेड़ कटने की जानकारी नहीं थी, लेकिन सुबह कटे हुए चार पेड़ मिले। गश्ती टीम की वजह से तस्कर लकड़ी नहीं ले जा पाए।”रेंजर चौरसिया ने आगे कहा कि रात में घूम रहे दो लड़कों का नंबर उनके पास है और उनका सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) निकाला जा रहा है। मीडिया द्वारा बीट गार्ड की मिलीभगत के सवाल पर उन्होंने कहा, “अभी मिलीभगत की पुष्टि नहीं हुई है। जांच में सब साफ हो जाएगा। ऐसी संभावना कम ही रहती है।” हालांकि, सोशल मीडिया में 10-12 पेड़ कटने की बात कही जा रही है, लेकिन रेंजर ने इसे महज चार पेड़ तक सीमित बताया।आगे की कार्रवाई और चिंता वन विभाग ने तत्काल जप्ती कार्रवाई शुरू कर दी है और संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वन माफियाओं का यह हमला वन संपदा पर बढ़ते खतरे का संकेत है। यदि ऐसी लापरवाही जारी रही, तो क्षेत्र के कीमती जंगलों को भारी नुकसान पहुंचेगा। स्थानीय लोग विभाग से सख्त कार्रवाई और नियमित गश्त की मांग कर रहे हैं ।यह मामला वन संरक्षण की चुनौतियों को उजागर करता है। जांच के नतीजे जल्द आने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, सागौन के पेड़ कट गए, जिससे पर्यावरणीय क्षति का खतरा बढ़ गया है। वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन क्या यह केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगा? या विभाग वफादारी निभाते हुए सख्त कार्रवाई करेगा? जांच रिपोर्ट का इंतजार है।







