ताप्ती परिक्रमा पदयात्रा पहुंची कुनखेड़ी: रंभा सहित जगह-जगह भव्य स्वागत
रिपोर्ट श्याम आर्य
भीमपुर– सूर्यपुत्री गुरु माता मां ताप्ती की संपूर्ण परिक्रमा पदयात्रा का छठवां वर्ष चल रहा है। यह निशुल्क 64 दिवसीय पैदल यात्रा उद्गम से संगम तक मां ताप्ती की पूरी परिक्रमा पदयात्रा द्वारा की जाएगी। मां ताप्ती के पदयात्रियों श्रद्धालुओं ने बताया कि यात्रा की शुरुआत तब हुई जब कोरोना महामारी का प्रकोप पूरे विश्व में फैला था और लोग एक-दूसरे से मिलने से डरते थे। पिछले 6 वर्षों में ताप्ती भक्तों ने पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार और बस से भी इस परिक्रमा को पूरा किया है। मां ताप्ती तटवासी भक्तों का नैतिक दायित्व है कि वे इस परिक्रमा को निरंतर बनाए रखें।
मां ताप्ती का संक्षिप्त परिचय और गौरवशाली परिवार है
सूर्यपुत्री मां ताप्ती की कृपा से मां ताप्ती तटवासियों को भरण-पोषण सहित वैभव व समृद्धि प्राप्त हो रही है। हम भाग्यशाली हैं जो मां ताप्ती के सान्निध्य में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। और इसका सौभाग्य प्राप्त हो रहा है जल देवी मां ताप्ती प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सभी जीवों पर कृपा बरसाती हैं, तप-कष्ट दूर कर निरोगी व सुखमय जीवन प्रदान करती हैं।
मां ताप्ती का गौरवशाली परिवार अद्भुत है
:पिता: सूर्य देव ,माता: संध्या ,भाई: छाया, यमराज, शनिदेव, अश्विनी कुमार बहन: यमुना (कालिंदी)बहनोई: श्रीकृष्ण मां ताप्ती का विवाह वरुण देव के अवतार, चंद्रवंशी राजा सवरन से हुआ। उनके पुत्र गुरुदेव बने, जिनकी कर्मस्थली कुरुक्षेत्र धर्म क्षेत्र कहलाया जहां महाभारत युद्ध हुआ। ताप्ती पुत्र गुरु महाराज ने पृथ्वी पर धर्म की ध्वजा लहराई, जिससे गुरु वंश आरंभ हुआ। इस वंश में महाराजा सातन हुए, जिनका विवाह गंगा से हुआ, इस प्रकार गंगा मां ताप्ती की कुल बनी। यहीं से कौरव-पांडव वंश चला। मां ताप्ती को 21 कल्पों में विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे ताप्ती, तापी, सत्य, सत्यदभवा, सावित्री, श्यामा, कपिला, कपिलंबिका, तपिनी, तपनहृदा, नासत्या, सहस्त्रकरा, मृतस्यदिनी आदि
मां ताप्ती रथ, पदयात्रा कुंनखेड़ी में विश्राम,
ग्राम पंचायत कुंनखेड़ी के सचिव रमेश येवले, सहित ग्राम के भक्तों ने यात्रा का विश्राम कराया ओर समस्त पद यात्रियों को भोजन व्यवस्था की साथ ही रंभा सहित आज हनुमान मंदिर समाधिभूरू रातामाटी में यात्रा का भव्य स्वागत व अभिनंदन किया। ताप्ती नदी जहां-जहां से गुजरी, वहां बड़े-बड़े पहाड़-पर्वत पार कर पैदल यात्री वर्षों से इस ताप्ती परिक्रमा को चला रहे हैं। रथ यात्रा रंभा होते हुए दोपहर में हनुमान मंदिर रातामाटी पहुंचे पदयात्री भोजन-प्रसादी ग्रहण कर आगे प्रस्थान किया वही आज ग्राम कुनखेड़ी में यात्रा का विश्राम होगा।
यात्रा का मार्ग और विशेषताएं
यह यात्रा मध्य प्रदेश के खंडवा-बुरहानपुर जिलों से होकर महाराष्ट्र के अमरावती, जलगांव, धुले, नंदुरबार, फिर गुजरात के तापी, नर्मदा व सूरत जिलों से गुजरती है। अंत में डुमस की खाड़ी में ताप्ती अरब सागर में समाहित होती है। दुर्गम व जोखिम भरे मार्गों के बावजूद महिलाएं-पुरुष, विभिन्न जाति-उम्र के लोग आस्था से जुड़ते हैं। ग्रामों में ताप्ती भक्त भक्तिमय वातावरण बनाते हैं, यात्रियों की हर असुविधा दूर करते हैं।यात्रा के साथ मां ताप्ती का निशान चलता है, जिसमें उद्गम जल व छायाचित्र होता है। कुंनखेड़ी के ग्रामवाशियो ने विधिवत रथ में विराजी मां की सुबह-शाम आरती कर भोजन प्रसादी की सेवा भाव चलता रहा जगह जगह ग्रामीण पूजन-पाठ करते हैं। मां ताप्ती का आशीर्वाद ताप्तीतट के ग्रामवासियों सदैव प्राप्त होता आ रहा है







