भीमपुर विकासखंड के उपस्वास्थ्य केंद्र बदहाल: उपस्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके, ग्रामीण परेशान, ग्रामीण इलाज को भटक रहे, झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाने को मजबूर
रिपोर्ट श्याम आर्य
भीमपुर विकासखंड के पिपरिया, पलस्या और रातामाटी गांवों में लाखों रुपये की लागत से बने सामुदायिक उपस्वास्थ्य ,उपकेंद्र आज शोपीस बन कर चुके हैं। इन केंद्रों पर ताले लटके होने से ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से पूरी तरह वंचित हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इलाज के लिए 30-35 किमी दूर भीमपुर या भैंसदेही स्वास्थ्य केंद्र तथा गंभीर मामलों में 50-55 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है इससे समय, धन दोनों खर्च हो रहे
सरकार ने प्रदेश और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावी ढंग से चला पाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। भीमपुर विकासखंड के पिपरियाढाना, पलस्या व रातामाटी के उपस्वास्थ्य केंद्रों का हाल देखिए तो जर्जर दीवारें, खराब झाड़ियों से गंदगी का भरा परिसर उपेक्षा की पोल खोलते हैं। इन केंद्रों में न तो कोई डॉक्टर है, न नर्स और न ही कोई कर्मचारी। दवाइयों व टीकाकरण जैसी बुनियादी सेवाओं के अभाव में ग्रामीण झोलाछाप चिकित्सकों के जाल में फंस रहे हैं, जो अक्सर उनकी जान जोखिम में डाल देते हैं।
कर्मचारियों की लापरवाही, ग्रामीणों की व्यथा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इन उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण होने पर सबको लगा था कि अब गांव में ही बेहतर इलाज उपलब्ध हो जाएगा। लेकिन कर्मचारियों की मनमानी और तैनाती में लापरवाही ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। पहले तैनात स्टाफ कभी-आते तो कभी ला पता रहते हैं जिम्मेदार अधिकारी भी इन पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं । ग्रामीण ने बताया, “जब केंद्र बना था, तो महिलाओं व बच्चों को गांव में ही चेकअप व टीका मिलने की उम्मीद जगी थी। आज यह इमारत खंडहर जैसी हो चुकी है। गर्भवती बहुओं को रात में दर्द होने पर भटकना पड़ता है।”एक अन्य ग्रामीण ने कहा उप स्वास्थ्य केंद्र खुलना तो दूर,, यहां पदस्थ कर्मचारी कौन हैं उसकी भी जानकारी नहीं है गरीब मजदूर किसानों का ग्राम पिपरियाढाना से बैतूल 35 किमी जाना संभव नहीं। मजबूरन झोलाछाप डॉक्टर की शरण में जाने को मजबूर होना पड़ता है
हर गांव में झोलाछाप डॉक्टर तैनात रहते है
ग्राम धामनिया, ग्राम चांदु, ग्राम रातामाटी, ग्राम चोहटा जैसे गांवों में वर्षों से तैनात हैं झोलाछाप डॉक्टर झोलाछाप डॉक्टर महंगे इंजेक्शन देकर लूट लेते हैं।” इसी तरह पलस्या की हालत भी खराब है हमेशा उप स्वास्थ्य केंद में ताला ही लटका हुआ दिखाई देता है
ग्रामीण इलाकों में दूरी बन रही घातक, समय पर इलाज न मिलने से हादसे
भीमपुर विकासखंड के इन दूरस्थ गांवों में सड़कें टूटी-फूटी हैं। उपकेंद्र बंद होने से छोटी-मोटी बीमारियों में भी मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। गंभीर रोगों जैसे डिलीवरी, बुखार या चोट में देरी से पहुंचने में हालत बिगड़ जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि केंद्रों पर तत्काल जिम्मेदार स्टाफ तैनात कर नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए ।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। लेकिन ग्रामीणों को तत्काल राहत की जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं का यह बदहाल चेहरा न केवल सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ग्रामीणों के भविष्य को भी खतरे में डाल रहा है।







