ताप्ती में बहकर आई पानी की लहर से — सूखी धारा में लौटे पशु पक्षी के जीवन, किसानों के चेहरे पर खुशी
रिपोर्ट श्याम आर्य
भीमपुर –ताप्ती नदी के सूखे तट पर अचानक बहते पानी ने जीवन को नई उर्जा दे दी। लंबे समय सूखी दिखने वाली ताप्ती नदी में पानी छोड़ा गया पानी आने से आसपास के गाँवों में खुशी का माहौल छा गया है। स्थानीय जानकारों और ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक राहत जंगली जानवरों, घरेलू पशुओं, पक्षियों और बंदरों को मिली है, जिनके लिए पेयजल की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई थी।
जानकारों का कहना
स्थानीय वन विभाग और पशु-पक्षी विशेषज्ञों की माने तो हालिया मानसून में देरी होने से नदी में पानी के आने से जंगली प्रजातियों के व्यवहार में स्पष्ट बदलाव देखा गया है। “तापमान और वर्षा की अनियमितता के कारण पिछले कई महीनों से ताप्ती का प्रवाह शिथिल हो गया था,” “पानी आने से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ जंगली जानवरों अन्य जीवों के लिए पिने का जल उपलब्ध हुआ है, जिससे उनका रौनक वापस लौट रहा है।”
*पशु-पक्षी तथा जंगली जीवों की सुधरती हालत*
स्थानीय लोगों ने पक्षी प्रेमियों ने बताया कि नदी के तट पर पहले जहां पक्षियों की संख्या घटी हुई थी, वहीं अब दर्जनों प्रजातियाँ नदी किनारे दिखने लगे हैं। ग्रामीणों ने कहा”हमने कल नदी के किनारे पर कई बत्तखों एवं तराई पक्षियों को देखा,” एक गाय चराने वाले युवक रामू ने बताया। स्थानीय ग्रामीणों ने यह भी कहा कि बंदरों का व्यवहार अधिक शांत दिखा है क्योंकि पानी के स्रोतों के पास उनका झगड़ा कम हो गया है।
किसानों में खुशी, सिंचाई के संकेत
नदी में पानी देख कर किसानों के चेहरे खिल उठे। कई किसानों ने बताया कि पिछले सीज़न में जलस्तर घटने से बोरवेल एवं सिंचाई संबंधित समस्याएँ बढ़ गई थीं। “आज ताप्ती में बहता पानी देखकर दिल खुश हुआ। यदि यह प्रवाह बरकरार रहा, तो हमारे खेतों की मिट्टी में नमी लौटेगी और बोरवेल पर भी दबाव कम होगा,” किसानों की माने तो खेतों में सिंचाई संकट कम होने से फसल बुवाई और मूंग की फसलों की स्थिति सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय लोग और राहत कार्य
स्थानीय पंचायतों और स्वयंसेवी समूहों ने कहा कि पानी के आ जाने से वे पशुओं के लिए अस्थायी पानी के पुष्टिकरण बिंदु बंद कर सकेंगे और नदी किनारे पर पानी का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करेंगे। पशुपालक परिवारों ने नन्हे पालतू पशुओं और घर के पशुओं के लिए राहत की सांस ली है। कुछ गाँवों में लोग नदी किनारे साफ-सफाई और प्लास्टिक-मलबा हटाने का कार्य भी कर रहे हैं, ताकि पानी शुद्ध रहे और जलीय जीवन सुरक्षित रहे।
चुनौतियाँ और सतर्कता
हालाँकि पानी आना सुखद संकेत है, विशेषज्ञों ने सूचित किया है कि यह अस्थायी बारिश या ऊपरी क्षेत्रों के डैम से जल बहाव के कारण भी हो सकता है। यदि नदियों के स्रोतों में वर्षा लगातार नहीं हुई तो यह प्रवाह टिकाऊ नहीं रहेगा। जल संवर्धन, नदियों के ऊपरी बेसिनों में वृक्षारोपण, और बुनियादी ढांचे के सुधरने से ताप्ती का प्रवाह स्थिर किया जा सकता है।
Author: Betul News Times
मैं श्याम आर्य Betul news time' का एडिटर हूं। मैं 2014 से लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हूं में betul news time पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मैने 2015 में सबसे पहले पत्रिका, फिर ताप्ती दर्शन,दबंग न्यूज भोपाल, बैतूल वाणी पर काम करने का अनुभव प्राप्त किया हैं।इसके अलावा मैं 2010 से पत्रकारिता/मीडिया जगत से लगातार जुड़ा हुआ हूं। न्यू भोजराज टाइम भोपाल समाचार में लगभग 2 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के, ताप्ती दर्शन,बैतूलवाणी पत्रिका के लिए काम कर रहा हूं हमेशा धार्मिक खबरें साथ ही पॉजिटिव खबरें पर काम करना पसंद करता हूं जिसमें समस्त पाठकों सहित शासन प्रशासन तक जानकारी पूर्णत पहुंच सके श्याम आर्य मोबाइल नंबर 7697501111







