आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और परिवार जन ने बड़ी धूमधाम से बनाया सेवानिवृत्ति का कार्यक्रम, नौकरी छोटी हो या बड़ी जिम्मेदारी,से कार्य करना चाहिए
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पद से सेवानिवृत्ति’में परिवारजन ने कहा ममता, त्याग और संघर्ष की मिसाल हैं,माँ
रिपोर्ट श्याम आर्य
भीमपुर विकासखंड अंतर्गत परियोजना भीमपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती लक्ष्मी आर्य ने अपने लंबे सेवाकाल में कर्तव्यनिष्ठा, संघर्ष और समर्पण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। गोदड़ियाढाना क्षेत्र में कार्यरत रहते हुए उन्होंने हमेशा अपने दायित्वों को सर्वोपरि रखा और पूरी निष्ठा एवं श्रद्धा के साथ अपनी सेवाएं दीं। परिवार जन बताया माताजी सबसे पहले अपनी नौकरी को जिम्मेदारी से करते थे कितना भी बड़ा काम आ जाए पर स्कूल जाना नहीं छोड़ा वही परिवारजन ने यह भी बताया की आज परिवार जिस मुकाम पर खड़ा है वह सिर्फ मां और मां की देन है ₹300 प्रति महान वेतन पर अपने परिवार को इस मुकाम पर लाकर खड़ा करने का प्रथम श्रय मां को ही जाता है हमें माँ ने उस काबिल बनाया कि हम अपने पैरों पर खड़े हैं ये मां की बदौलत है परिवारजन ने कहा नौकरी छोटी हो या बड़ी इसी नौकरी में पूरा जीवन सुधार है
श्रीमती लक्ष्मी आर्य बताती हैं कि नौकरी के शुरुआती दौर में उन्हें मात्र ₹300 प्रतिमाह मानदेय प्राप्त होता था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी अपने कार्य से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। सीमित आय में पूरे परिवार का पालन-पोषण करना और साथ ही नौकरी की जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए आसान नहीं था।
उन्होंने जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कई बार स्वयं तेज बुखार में होने के बावजूद बच्चों को भोजन बनाकर स्कूल भेजना पड़ता था। वे अपने परिवार और नौकरी दोनों के प्रति पूरी जिम्मेदारी निभाती रहीं।
पुराने संघर्ष भरे दिनों को याद करते हुए उनकी आंखें आज भी नम हो जाती हैं। वे अपने बच्चों को हमेशा यही सीख देती हैं कि —
“समय के साथ चलना सीखो, विपत्तियां कभी भी आ सकती हैं, लेकिन मेहनत और ईमानदारी पर भरोसा कभी मत छोड़ो।”
उन्होंने बताया कि उस समय पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं थे। मीटिंग में शामिल होने के लिए उन्हें रातामाटी तक पैदल जाना पड़ता था और वहां से बस द्वारा भीमपुर पहुंचना होता था। शाम को बस से लौटकर फिर पैदल घर पहुंचना पड़ता था। बच्चे घर पर अकेले मां की राह देखते रहते थे। घर पहुंचते ही वे जल्दी-जल्दी भोजन बनाकर बच्चों को खिलातीं और फिर उन्हें सुलाती थीं।
संघर्ष, त्याग और परिश्रम से भरा उनका जीवन आज महिलाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गया है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत, धैर्य और जिम्मेदारी से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। इस कार्यक्रम समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित परिजन मौजूद रहे
सेवानिवृत्ति के अवसर पर परिवारजनों, सहकर्मियों एवं क्षेत्रवासियों ने श्रीमती लक्ष्मी आर्य के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी। सभी ने उनके उज्ज्वल एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।
Author: Betul News Times
मैं श्याम आर्य Betul news time' का एडिटर हूं। मैं 2014 से लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हूं में betul news time पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मैने 2015 में सबसे पहले पत्रिका, फिर ताप्ती दर्शन,दबंग न्यूज भोपाल, बैतूल वाणी पर काम करने का अनुभव प्राप्त किया हैं।इसके अलावा मैं 2010 से पत्रकारिता/मीडिया जगत से लगातार जुड़ा हुआ हूं। न्यू भोजराज टाइम भोपाल समाचार में लगभग 2 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के, ताप्ती दर्शन,बैतूलवाणी पत्रिका के लिए काम कर रहा हूं हमेशा धार्मिक खबरें साथ ही पॉजिटिव खबरें पर काम करना पसंद करता हूं जिसमें समस्त पाठकों सहित शासन प्रशासन तक जानकारी पूर्णत पहुंच सके श्याम आर्य मोबाइल नंबर 7697501111






