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भीमपुर —— मां ताप्ती परिक्रमा पदयात्रा के श्रद्धालुओं का घोघरा घाट में भव्य स्वागत

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मां ताप्ती परिक्रमा पदयात्रा के श्रद्धालुओं का घोघरा घाट में भव्य स्वागत

भीमपुर, 12 फरवरी 2026: मां ताप्ती घोघरा घाट ताप्ती नदी के समीप मां सूर्यपुत्र माताप्ती मंदिर में तपती परिक्रमा पद यात्रियों का आगमन हुआ सभी पद यात्रियों व श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया गया आज सुबह घोघरा घाट पर यात्रियों ने पहुंचकर भक्तों में उत्साह का संचार कर दिया। हजीरा (गुजरात) सूरत से प्रारंभ हुई इस पादयात्रा के यात्रियों का स्थानीय लोगों ने जोरदार स्वागत किया। यात्रियों ने मां ताप्ती के दर्शन कर पूजन अर्चन कर आरती उतारी और घाट पर एकत्रित भक्तों संग आशीर्वाद ग्रहण किया।पदयात्रा के प्रमुख संयोजक श्री राजेश दिक्षित ने बताया कि यह परिक्रमा हजीरा (गुजरात) सूरत से शुरू होकर मूलताई तक चलेगी और 17 फरवरी 2026 को समापन होगा। उन्होंने कहा, “प्रतिवर्ष मां ताप्ती परिक्रमा अलग-अलग किनारों से गुजरती है, जिससे भक्तों को अनेक तीर्थस्थलों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। मां ताप्ती की असीम कृपा से यह यात्रा आध्यात्मिक आनंद प्रदान करती है।” यात्रा में अनेकों श्रद्धालु शामिल हैं, जो पैदल चलकर नदी की परिक्रमा कर रहे हैं।इस अवसर पर जनपद पंचायत भीमपुर के अध्यक्ष श्री भैय्यालाल जी इरपाचे, चोहटा पोपटी के सरपंच श्री रामकिशोर धुर्वे, जनआस्था सेवा समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। घोघरा घाट पर यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। भोजनोपरांत विश्राम करने के बाद यात्रियों को आगे आमढाना के लिए रवाना किया गया।मां ताप्ती परिक्रमा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता को भी प्रोत्साहित करती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस यात्रा से क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ताप्ती परिक्रमा:    ­मुलताई के उद्गम स्थल की ओर एक कठिन लेकिन दिव्य यात्रा वर्षों से चली आ रही ताप्ती परिक्रमा पदयात्रा आज बैतूल जिले के उद्गम स्थल मुलताई के करीब पहुँच चुकी है। भक्तों का विशाल जत्था, जो ताप्ती माता की परिक्रमा के लिए निकला था, ऊबड़-खाबड़ रास्तों, तीखी चढ़ाइयों और घने जंगलों का सामना करते हुए बेहद परिश्रम से इस पवित्र यात्रा को पूरा करने की ओर अग्रसर है। सुबह से शाम तक पैदल चलते हुए ये यात्री प्रकृति के कठोर स्वरूप को झेल रहे हैं, लेकिन हर कदम पर माता ताप्ती का आशीर्वाद उन्हें शक्ति दे रहा है।घने जंगलों को पार करते हुए यात्रियों ने ताप्ती नदी के समीप पहुँचकर अद्भुत दृश्यों का दर्शन किया। चारों ओर फैले हरे-भरे वन, जहाँ ऊँचे-ऊँचे साल के पेड़ आसमान छूते नजर आते हैं, और बीच-बीच में चहचहाते पक्षियों की ध्वनियाँ यात्रियों के कानों को सुकून देती हैं। जंगल के उस पार, ताप्ती नदी का उद्गम स्थल प्रकट होता है—एक ऐसा दृश्य जो भक्तों के हृदय को आनंद से भर देता है। नदी का पानी इतना शुद्ध और ठंडा है कि वह पहाड़ी चट्टानों से निकलते हुए चाँदी की धारा की तरह चमकता हुआ बहता प्रतीत होता है। भक्तों ने बताया कि यह दृश्य देखने योग्य है; बड़े-बड़े पत्थर नदी के किनारे इस तरह व्यवस्थित हैं मानो कोई दैवीय शिल्पकार ने उन्हें मन में बसी कहानी को साकार करने के लिए जमा किया हो।कहीं नदी का तट समतल मैदान की तरह फैला दिखाई देता है, जहाँ छोटे-छोटे पत्थर चिकने कंकड़ बनकर यात्रियों के पैरों तले सहलाते हैं। तो कहीं विशालकाय पहाड़ों के बीच मटकी नुमा गुफाएँ और ऊँचे पत्थर के टीले प्रकृति के चमत्कार को उजागर करते हैं। एक यात्री ने भावुक होकर कहा, “हर मोड़ पर, हर स्थान पर हमें माता ताप्ती का ऐसा सौभाग्य प्राप्त हुआ जो शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। विशाल पत्थर पहाड़ों की गोद में बैठे हुए नदी को निहारते प्रतीत होते हैं, और हम भक्त उनके साक्षी बन रहे हैं।” यात्रा के दौरान हर कदम पर प्रकृति के विविध रूप—झरने की कलकल, जंगली फूलों की सुगंध, और शांत वादियों की ठंडक—ने भक्तों को नई ऊर्जा प्रदान की।आज बैतूल के इस उद्गम स्थल पर पहुँचकर यात्रियों ने आरती उतारी, भजन गाए और माता ताप्ती से परिक्रमा पूर्ण करने की प्रार्थना की। यह यात्रा न केवल शारीरिक कष्ट की है, बल्कि आत्मिक शुद्धि की भी। भक्तों का मानना है कि ताप्ती माता की कृपा से यह परिक्रमा सफल होगी, और वे वर्षों की परंपरा को निभाते हुए आगे बढ़ेंगे।

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Author: betulnews times