श्री श्री 1008 त्रिवेणी भारती नागा दादा जी की पुण्यतिथि पर भैंसदेही में उमड़ा भक्तों का अपार जनसैलाब
रिपोर्ट श्याम आर्य
भैंसदेही। श्री श्री 1008 त्रिवेणी भारती नागा दादाजी के पावन दरबार में उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। नागझिरी संस्थान भैंसदेही में आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर दादा जी के प्रति अपनी भक्ति का प्रदर्शन किया। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा, बल्कि सामूहिक एकता और सेवा भाव का भी अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
प्रथम दिन: भव्य शोभायात्रा से धार्मिक उत्साह की शुरुआत
आयोजन का शुभारंभ रविवार को श्री श्री नागा दादा जी की प्रतिमा को भव्यता पूर्वक में विराजित करने के साथ हुआ। इसके बाद नगर में निकाली गई शोभायात्रा ने भक्तों में भक्ति का संचार कर दिया। बैंड-बाजों के साथ चल रही इस यात्रा में दादा भक्तों ने नारे लगाए, भजन गाए और फूल बरसाए। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस शोभायात्रा को देखकर दादा जी की महिमा का गुणगान किया।
द्वितीय दिन: अखंड नाम स्मरण और संकीर्तन का महासमागम
सोमवार को द्वितीय दिन का श्री बड़े दादा जी, छोटे दादा जी के अखंड नाम स्मरण से हुआ। “भजलो दादाजी का नाम, भजलो हरिहर जी का नाम” के उद्घोष से संस्थान प्रांगण गुंजायमान हो उठा। क्षेत्र के आसपास के समस्त दादा भक्तों और भजन मंडलियों ने एकत्र होकर दादा नाम संकीर्तन में लीन हो गए। दादा नाम के इस गुणगान ने वातावरण को दिव्यता प्रदान की, जिसमें युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी सहभागी बने।
तृतीय दिन: हवन, कथा और विशाल भंडारे के साथ समापन
मंगलवार को तृतीय एवं अंतिम दिन हवन और सत्यनारायण व्रत कथा का आयोजन किया गया। इन पवित्र अनुष्ठानों के समापन के बाद विशाल भंडारे में महाप्रसाद का वितरण हुआ। क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं सहित बुजुर्ग महिलाएं, पुरुष और बच्चे पहुंचे तथा प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
नागझिरी संस्थान भैंसदेही का यह भंडारा नगर का सबसे बड़ा माना जाता है। इसमें गुड़ बनाने की बड़ी-बड़ी कढ़ाइयों में सब्जियां पकाई जाती हैं, स्वादिष्ट हलवा तैयार किया जाता है तथा सैकड़ों आटे की बोरियों से गरमागरम पूरियां बनाई जाती हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ में प्रसाद वितरण सुचारू रूप से चला, जिससे सभी ने दादा जी की कृपा का अनुभव किया।
सहयोगियों को धन्यवाद
दरबार के समस्त सदस्यों, पदाधिकारियों, मंडल संरक्षक एवं दादा भक्तों ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी भक्तों के बिना यह आयोजन संभव न होता। संस्थान परिवार ने आगामी वर्षों में भी ऐसे धार्मिक आयोजनों को जारी रखने का संकल्प लिया।
यह पुण्यतिथि महोत्सव दादा जी के संदेश ‘नाम जपो, भक्ति करो’ को साकार रूप प्रदान करता रहा, जो भैंसदेही और आसपास के क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बन गया।







