“जंगल रहेगा तो हम रहेंगे” के नारों से गूंजा पिपरिया, फायर सीजन में जंगलों को आग से बचाने की ली सौगंध
भीमपुर— भीमपुर विकासखंड क्षेत्र के वन क्षेत्र मोहदा के ग्राम पिपरिया में आयोजित अग्नि सुरक्षा जागरूकता बैठक ने जंगलों की रक्षा का संकल्प दिला दिया। “जंगल रहेगा तो हम रहेंगे” और “हम सब ने ये ठान लिया है, जंगल को आग से बचाना है” जैसे जोशीले नारों के बीच ग्रामीणों ने फायर सीजन में जंगलों को आग से बचाने का प्रण लिया। यह बैठक प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री मधु वी. राज और वनमंडल अधिकारी पश्चिम बैतूल श्री एल. के. वासनिक के सान्निध्य में उपवनमंडल अधिकारी तावङी श्री जितेंद्र अवासे तथा परिक्षेत्र अधिकारी मोहदा श्री रवीन्द्र पाटीदार द्वारा वन चौकी पिपरिया पर आयोजित की गई।बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी फायर सीजन में जंगलों को आग के प्रकोप से बचाना था। श्री अवासे और श्री पाटीदार ने ग्राम पिपरिया, जीरूढाना, बटकी, गुरूवा, पडार तथा कासमारखण्डी के ग्रामीणों को संबोधित करते हुए महुआ पेड़ों के नीचे आग न लगाने, आग पूरी तरह बुझाने, जंगल बचाने में वन विभाग का सक्रिय सहयोग करने तथा खेतों में नरवाई जलाने से परहेज करने की अपील की। उन्होंने अतिक्रमण के प्रयासों पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि इससे जंगल और जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचती है। “जंगल हमारा जीवन आधार है। एक चिंगारी लाखों पेड़ों को राख कर सकती है। आइए, हम सब मिलकर इसे रोकें,” श्री पाटीदार ने कहा।बैठक में वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष व सदस्यों के अलावा ग्राम पिपरिया के सरपंच श्री अजबसिंह चौहान, काबरा के सरपंच श्री झूमकलाल बारस्कर, कासमारखण्डी की सरपंच सुनीता पांसे, गुरुवा की सरपंच बुधिया बारस्कर, रतनपूर मंडल अध्यक्ष बब्बू सोनी, जनपद सदस्य बब्बू सिंह पदम तथा अन्य वनकर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने जंगलों की सुरक्षा में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।विशेष रूप से आयोजित इस रजिस्ट्रेशन अभियान के तहत उपस्थित सभी ग्रामीणों के मोबाइल नंबर विभाग के फॉरेस्ट फायर पोर्टल पर दर्ज किए गए। इससे जंगल में कहीं आग लगने की सूचना एसएमएस के माध्यम से तुरंत सभी को मिल सकेगी, जिससे आग बुझाने में देरी न हो। यह कदम जंगलों की सुरक्षा को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।वन विभाग ने बताया कि मध्य प्रदेश के वनों में हर साल फायर सीजन के दौरान भारी नुकसान होता है। ग्रामीणों का सहयोग ही इसे रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। बैठक समाप्ति पर सभी ने नारों के साथ जंगलों की रक्षा का संकल्प दोहराया।







