पुलिस महकमे की आन-बान-शान रहे टीआई विष्णु प्रसाद मौर्य, भावुकता के साथ सम्पन्न हुआ ऐतिहासिक विदाई समारोह
थाना मोहदा में पदस्थ थाना प्रभारी श्री विष्णु प्रसाद मौर्य* के सेवा निवृत्ति अवसर पर आयोजित विदाई समारोह एक अविस्मरणीय एवं अत्यंत भावुक क्षणों का साक्षी बना। यह समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि जनमानस के हृदय से उमड़े स्नेह, सम्मान और अपनत्व का अद्भुत संगम बन गया।
कार्यक्रम में संत सिंगाजी गवली समाज संगठन, जिला बैतूल के अध्यक्ष श्री भूरा यादव, दामजीपूरा भाजपा मंडल अध्यक्ष श्रीमती ऊषा ढिकारे, भाजपा मंडल अध्यक्ष आठनेर श्री सुनील टेकपुरे जी, भाजपा मंडल अध्यक्ष श्री यदुराज रघुवंशी, भाजपा मंडल अध्यक्ष श्री अनिल उयके, श्री मंशाराम चौहान जी, श्री गुरमीत सिंह सलूजा (टीटू सरदार जी), श्री अशोक बिसोने, तथा संत सिंगाजी गवली समाज युवा मोर्चा अध्यक्ष, डोडाजाम श्री आशाराम साठे सहित थाना मोहदा का समस्त स्टाफ, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।*
जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, माहौल पूरी तरह भावुकता से सराबोर हो गया। *लोगों की आंखों में आंसू थे—लेकिन उन आंसुओं में विदाई का दुःख ही नहीं, बल्कि एक ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और जनसेवक अधिकारी के प्रति अपार सम्मान भी झलक रहा था।
श्री विष्णु प्रसाद मौर्य ने अपने कार्यकाल के दौरान केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि जनता के दिलों में विश्वास, सुरक्षा और आत्मीयता का भाव स्थापित किया। उन्होंने अपने सौम्य व्यवहार, निष्पक्ष कार्यशैली और संवेदनशील दृष्टिकोण से यह सिद्ध किया कि पुलिस और जनता के बीच संबंध केवल नियमों का नहीं, बल्कि विश्वास और मानवीयता का भी होता है।
उनकी कार्यशैली ने क्षेत्र में शांति, सद्भावना, भाईचारा एवं सामाजिक समरसता को नई दिशा दी। यही कारण रहा कि उनकी विदाई के अवसर पर हर वर्ग के लोग स्वतः उपस्थित होकर उन्हें अंतिम सम्मान देने पहुंचे।
यह दृश्य इस बात का जीवंत प्रमाण बना कि एक सच्चा लोकसेवक अपने पद से नहीं, बल्कि अपने कर्म, आचरण और व्यवहार से लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ता है। मौर्य साहब की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि उन्होंने पद की गरिमा को बनाए रखते हुए जनता के दिलों में स्थायी स्थान बनाया।
यह विदाई समारोह समाज के प्रत्येक लोकसेवक के लिए एक प्रेरणास्रोत है कि यदि सेवा भाव, ईमानदारी और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य किया जाए, तो विदाई के क्षण भी गौरव और सम्मान से भरे होते हैं।
अंत में जय हिंद, भारत माता की जय” एवं “वंदे मातरम्”के गगनभेदी नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, किन्तु लोगों के हृदय में श्री विष्णु प्रसाद मौर्य के प्रति सम्मान, स्नेह और स्मृतियाँ सदैव जीवित रहेंगी।







